National Poltics

लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका खारिज, कपिल सिब्बल की दलीलें भी नहीं आई काम

झारखंड हाई कोर्ट से बिहार के पूर्व सीएम व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में गुरुवार को चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। पिछले शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने लालू के मामले में विशेष नोटिस जारी कर फैसला सुनाने का समय निर्धारित किया। इसके बाद सीबीआइ व लालू के अधिवक्ता के समक्ष अपना फैसला सुनाया।

सीबीआइ कोर्ट ने लालू प्रसाद को देवघर, दुमका और चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सजा सुनाई है। उनकी ओर से हाई कोर्ट से उक्त तीनों मामलों में सजा को निलंबित करते हुए जमानत प्रदान करने का आग्रह किया है।

कपिल सिब्बल की दलीलें
पिछली सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद का पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि लालू प्रसाद को पूर्व में चाईबासा मामला (आरसी 20ए-96) में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने लालू के सिर्फ 11 माह जेल में रहने के बाद भी जमानत प्रदान की थी। सीबीआइ ने चाईबासा का दूसरा मामला (आरसी 68ए-96) भी आरसी 20ए-96 के समान ही है। क्योंकि ट्रेजरी भी एक है और उक्त मामले में सभी गवाह व दस्तावेज को इस मामले में भी संलग्न किया गया है।

विभागीय मंत्री बरी तो लालू कैसे दोषी
वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में दलील देते हुए अदालत को बताया कि इस मामले में तत्कालीन विभागीय मंत्री विद्यासागर निषाद, तत्कालीन विभागीय सचिव बेक जूलियस, नेता आरके राणा, जगदीश शर्मा व जगन्नाथ मिश्र बरी हो गए तो लालू प्रसाद ने किसके साथ मिलकर अवैध निकासी का षड्यंत्र रचा। अदालत ने लालू प्रसाद को षड्यंत्र करने का दोषी पाया गया है, जबकि सीबीआइ षड्यंत्र साबित करने में विफल रही है। यदि यह मामला षड्यंत्र का रहता तो सभी को दोषी करार दिया जाना चाहिए। इससे साबित होता है कि लालू ने कोई षड्यंत्र नहीं किया। लालू पर कुछ अधिकारियों को सेवा विस्तार देने और खास पद पर पदस्थापित रखने का आरोप भी लगाया गया है, लेकिन ये आरोप प्रमाणित नहीं होते।
सिब्बल ने कहा था कि दुमका कोषागार मामले में सिर्फ एक सरकारी गवाह दीपेश चांडक के गवाही के आधार पर निचली अदालत ने सजा सुनाई है। नियमानुसार सरकारी गवाह साक्ष्यों को पुख्ता करने में मदद करता है। उसे प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं माना जा सकता है। एक ही मामले के बयान को सभी मामलों में संलग्न किया गया है, जो कि गलत है। निचली अदालत ने षड्यंत्र रचने के आरोप में सात साल व भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (पीसी एक्ट) के आरोप में सात साल की सजा सुनाई है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है।

बीमारी का दिया हवाला
कोर्ट बताया गया था कि लालू प्रसाद की उम्र 71 हो गई है। उन्हें डायबटीज, बीपी, हृदय रोग सहित कई अन्य बीमारियां हैं। फिलहाल, उनका रिम्स में इलाज चल रहा है। लालू प्रसाद प्रतिदिन करीब 13 प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं।

लालू को करनी है चुनाव की तैयारी
लालू प्रसाद राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करनी है। जिसको लेकर पार्टी नेताओं के साथ उन्हें कई बैठक करनी होगी और रणनीति तय करनी होगी। उम्मीदवार भी तय करने होंगे। उम्मीदवारों को सिंबल देने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का हस्ताक्षर होना जरूरी है, इसलिए उन्हें जमानत प्रदान की जाए।

सीबीआइ ने किया विरोध
सीबीआइ की ओर से लालू प्रसाद की जमानत का विरोध किया गया। सीबीआइ के अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने कहा कि चारा घोटाला के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से पूर्व में लालू प्रसाद को मिली जमानत को इन मामलों से जोड़ा नहीं जा सकता। इससे पहले भी लालू प्रसाद की ओर से इसी प्रकार की दलील दी गई थी, जिसको हाई कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। इस कारण फिर से उन्हीं दलीलों के आधार पर जमानत मांगना उचित नहीं है। इस बार जमानत के लिए नया आधार लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि लालू प्रसाद राजद के अध्यक्ष है। कहा गया कि रिम्स में लालू प्रसाद का इलाज बेहतर तरीके हो रहा है। इस कारण उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

Related posts

विधानसभा- मोदी जी- मोदी जी चिल्लाने से बात नहीं बनने वाली, बजट में तो सिर्फ प्रपोजल हैं- सिंघा

digitalhimachal

भारत की पाकिस्तान को दो टूक- भारतीय पायलट की तुरंत वापसी चाहिए, कोई डील नहीं : सूत्र

digitalhimachal

देश व प्रदेश में होगी कांग्रेस की करारी हार : सतपाल सत्ती

digitalhimachal

Leave a Comment

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy