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श्री रेणुका जी के दयानंद भारती बने हिमाचल के पहले महामंडलेश्वर

गायत्री मंदिर श्रीरेणुकाजी के संचालक है महंत दयानंद भारती

जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी तीर्थ में स्थापित गायत्री मंदिर के संचालक हिमाचल प्रांत के महंत दयानंद भारती को प्रयागराज के महाकुंभ में महामंडलेश्वर व अंतरराष्ट्रीय संत की उपाधि से विभूषित किया गया।

यह उपाधि उन्हें जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर आचार्य अवधेशानंद गिरि ने हजारो संतों की उपस्थिति में प्रदान की।

महामंडलेश्वर बनाए जाने से पहले दयानंद भारती का पूजा अभिषेक के साथ-साथ बट अभिषेक भी किया गया।

जिसके बाद गद्दी पूजन किया गद्दी पूजन के पश्चात महामंडलेश्वर दयानंद भारती को चांदी की पालकी में बिठाकर पूरे कुंभ क्षेत्र में उनकी पेशवाई भी निकाली गई।

10 फरवरी को बसंत पंचमी के शाही स्नान में उनका हजारों संतों की उपस्थिति में महा स्नान करवाया जाएगा।



हिमाचल के पहले संत दयानंद भारती को हिमाचल का पहला महामंडलेश्वर बनने का सौभाग्य मिला है। इससे पहले कोई भी संत हिमाचल से महामंडलेश्वर नहीं बनाया गया है।

भारती को संत समाज ने सीधे महामंडलेश्वर की उपाधि दे दी है। जो जिला सिरमौर के साथ-साथ हिमाचल के लिए भी गौरव की बात है।

70 वर्षीय महामंडलेश्वर भारती जिला सिरमौर के कोटी धीमान पंचायत के छोटे से गांव माइला के रहने वाले हैं।

उनका बचपन से ही अध्यात्म की ओर रुझान हो गया था जिसके चलते वह 36 वर्ष पूर्व दग्योंन के संत 1008 प्यारा नंद ब्रह्मचारी जी के शिष्य बन गए थे।

कई वर्षों तक उन्होंने नंगे पैर व वस्त्र में तपस्या की। पिछले 36 वर्षों से गायत्री मंदिर में ही बहुत बड़ा आश्रम बनाकर निवास कर रहे हैं।

इसके अलावा दयानंद भारती ने बदरीनाथ हरिद्वार, हमीरपुर, अंबाला सहित कई अन्य आश्रम बनाएं हैं। तो वही हाल ही में 51, 51 हजार रुपए की राशि प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री राहत कोष में दे चुके हैं।

भारती हर वर्ष ऋषि पंचमी पर समाज में श्रेष्ठ कार्य करने वाले लोगों को गायत्री पुरस्कार से सम्मानित करते हैं।

जिला सिरमौर को नटनी के श्राप से मुक्त करने के लिए उन्होंने एक महायज्ञ भी सिरमौरी ताल में किया था। जिसके बाद उन्हें राजगुरु उपाधि भी दी गई थी।

महामंडलेश्वर भारती के उत्तरी भारत में हजारों शिष्य है वह अनपढ़ होते हुए भी श्रीमद्भागवत, महापुराण ,देवी भागवत इत्यादि परायण करते हैं। अभी तक दर्जनों पुस्तकें लिख चुके हैं।

महामंडलेश्वर दयानंद ने प्रयागराज कुंभ से फोन पर बताया कि वह जल्द ही श्रीरेणुकाजी तीर्थ पहुंचकर जन कल्याण हेतु एक बड़ा अनुष्ठान करेंगे।

उन्होंने कहा की उन्हें महामंडलेश्वर बनाना ना केवल हिमाचल के लिए बल्कि सिरमौर के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

क्योंकि पहले मंडलेश्वर बनाया जाता है, उसके बाद महामंडलेश्वर बनाया जाता है। जबकि उन्हें सीधे ही महामंडलेश्वर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि वह जन कल्याण के लिए हमेशा कार्य करते रहे है करते रहेंगे।

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