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अपनों की पलटीबाजी ने उलझाई भाजपा

एक सुर की तान में अचानक बज गए कई तराने,  सीएम, सत्ती और राणा तोड़ निकालने में जुटे

UNALok sabha Elections 2019 एकता के स्वर में ठीक नाच रही भाजपा के आंगन में लोकसभा के चुनाव का अखाड़ा किसी क्लेश से कम बनकर नहीं आया है। BJP की ताल व चाल को बिगाडऩे का काम चुनावी बिगुल ने किया है।

अनुशासन पर चलने वाली भाजपा ने ही अनुशासनहीनता की धज्जियां उड़ाने वाले अपने ही नहीं, बल्कि अपनों के रिश्तेदार भी शामिल हो गए हैं। ऐसे में अपनों की साथ खड़ा होने के वक्त पर पलटीबाजी ने भाजपा के नेतृत्व को न केवल हिलाया है, बल्कि जोर का झटका भी दिया है। हालत ऐसी है कि अपनों के ताने बाने के भाजपा ऐसी उलझी की अपने ही फैसलों पर कायम नहीं हो पा रही है और हालत यह है कि अपनों की लंगडी ने प्रचार पर निकले उम्मीदवारों के भविष्य पर सफेद चादर ओडऩे की तैयारी करवा दी है। ऐसे में मझधार में जहां दो उम्मीदवार फंस गए हैं।

वहीं पार्टी के प्रचार को आगे बढ़ाते हुए भाजपा भी अब उम्मीदवार ही बल्कि मोदी के लिए वोट मांगने लगी है। अचानक बदले हालातों ने चुनाव प्रचार में आगे बढ़ी भाजपा के कदमों को चाहे न रोका हो, लेकिन पिछली मेहनत पर रबड़ चलाने का काम जरूर कर दिया है। एक सुर से मधुर संगीत सुन रही भाजपा के अंागन में अचानक सुरों की ताल ऐसी बिगड़ी कि सुर-बेसुर हो रहे हैं। भाजपा के आपसी खींचतान के माहौल को इस कदर बढ़ा दिया जाएगा। यह शायद खुद नेताओं को भी यकीन नहीं था।

पार्टी के लिए सिर्फ टिकटों का ही बंटवारा क्लेश नहीं है, बल्कि कुछ सभी को एक सूत्र में बांधकर मोदी की माला में पिरोना भी टेड़ी खीर बन रहा है। ऐसे में समय की नजाकत और पार्टी के भीतरी पानी की गर्मी को भांपते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, राज्य भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती व संगठन महामंत्री पवन  राणा इस पूरे क्लेश की नजर उतारने का तरीका ढूंढने लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यदि बेसुर सुर में न आए तो पार्टी की चाल के साथ साथ नेतृत्व को भी दागदार कर सकते हैं।

कुछ नाराज, कुछ सुस्त

कांग्रेस चाहे अभी तो उम्मीदवारों पर माथा पच्ची कर रही हो, लेकिन भाजपा में स्थिति तेजी के बावजूद असहज होने लगी है। पार्टी में कुछ नेता व पदाधिकारी सरकार के काम व अपनी एडजस्मट न होने के चलते नाराज हैं, तो वहीं कुछ नेताओं की दुखती रग पार्टी पकड़ नहीं पा रही है, इसलिए वे सुस्त हो गए हैं। अब कई तो ऐसे हैं तो दिख तो मोर्चें पर रहे हैं, पर उनका निशाना कोई नहीं है।

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