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दो साल में इन पांच बड़े विवादों में फंसी योगी सरकार

दो वर्षों में कई ऐसे मौके आए जब सूबे की बीजेपी सरकार को विवादों का सामना करना पड़ा. ऐसे मामलों की भी कमी नहीं है, जिनमें सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप प्रत्यारोप लगते रहे.

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के दो साल पूरे हो गए. इन दो वर्षों में कई ऐसे मौके आए जब सूबे की बीजेपी सरकार को विवादों का सामना करना पड़ा. ऐसे मामलों की भी कमी नहीं है, जिनमें सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप प्रत्यारोप लगते रहे. विपक्ष ने इन घटनाओं और विवादों को मुद्दे की शक्ल दी तो कहीं न कहीं बीजेपी के लिए भी ये मामले परेशानी का सबब बनते नजर आए. हम बता रहे हैं ऐसे ही पांच मामले-

1. फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप

सूबे में योगी की सरकार आते ही पुलिस ने कानून व्यवस्था को काबू करने के नाम पर ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए. ये मामला इतना बढ़ गया कि योगी की पुलिस के साथ-साथ वो खुद भी विवादों में घिर गए. विपक्ष और मुठभेड़ में मारे गए कुछ लोगों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप लगाया. विपक्षी नेताओं का कहना था कि योगी ने अपने फायदे के लिए एनकाउंटर कराए हैं. मामला उस वक्त और गर्मा गया, जब यूपी पुलिस पर आरोप लगा कि अलीगढ़ में हुए दो एनकाउंटर किए गए. जिनके लिए मीडिया को मौके पर बुलाकर शूटिंग करवाई गई. उनमें से एक एनकाउंटर में मारे गए नौशाद की मां ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार दिया. उनका आरोप था कि पुलिस उनके बेटे को घर से उठाकर ले गई थी और मुठभेड़ में मार डाला. हालांकि पुलिस ने सभी आरोपों को नकार दिया. ऐसे ही मारे गए कुछ लोगों के परिवारों ने पुलिस हत्या करने के आरोप लगाए.

2. बुलंदशहर हिंसाः इंस्पेक्टर की हत्या

पुलिस को 3 दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर के गांव महाव में गोकशी की सूचना मिली. स्याना थाने के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह कई पुलिसकर्मियो को लेकर सरकारी टाटा सूमो यूपी13 एजी 0452 से मौके पर पहुंचे. वहां गोकशी के शक में भीड़ जमा थी. जिसका नेतृत्व बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज कर रहा था. उन लोगों ने रास्ता जाम कर लगा रखा था. इंस्पेक्टर सुबोध ने उन लोगों को समझाने की कोशिश की. लेकिन योगेश राज और उसके साथियों ने मिलकर पुलिस पर हमला कर दिया. पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी. इसी दौरान योगेश राज के इशारे पर इंस्पेक्टर सुबोध की पिस्टल और मोबाइल लूट लिया गया. फिर उन्हें गोली मार दी गई. जिससे उनकी मौत हो गई. इस मामले में मुख्य आरोपी की फरारी ने पुलिस और सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया.

3. एप्पल के अधिकारी की हत्या

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर विस्तार में यूपी पुलिस के कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी ने एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मार दी. जिसके चलते उनकी मौत हो गई. इस मामले में मृतक का परिवार लगातार पुलिस पर सवाल उठाता रहा. लखनऊ के गोमतीनगर थाने में इस वारदात की FIR दर्ज की गई. जिसमें विवेक की पत्नी ने पुलिसवालों के खिलाफ उनके पति के कत्ल का केस दर्ज कराया था. इस मामले में सरकार चारों तरफ से घिरती नजर आई. यहां तक कि पुलिस विभाग में ही आरोपी पुलिसकर्मी के समर्थन में एक कैंपेन शुरु हो गया था. जिससे सरकार और आला अफसर परेशान हो गए थे. इस हत्याकांड पर विपक्ष मुखर रहा. पुलिस पर आरोपियों को बचाने के आरोप भी लगे.

4. सहारनपुरः दलित-क्षत्रिय हिंसा

साल 2017 में यूपी के सहारनपुर जनपद में जातीय हिंसा भड़क गई थी. जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अपमान किए जाने के बाद दलित और क्षत्रिय आपस में भिड़ गए थे. बड़ी मुश्किल से पुलिस ने हालात काबू करने की कोशिश की थी. लेकिन तभी कई नेता प्रभावित इलाके में जाने लगे. इसी दौरान बसपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती दलितों का हाल जानने शब्बीरपुर गांव जा पहुंची. उनके वहां से जाने के बाद फिर से हिंसा भड़क गई थी. उस हिंसा में आशीष नामक युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी. पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था. बाद में मुख्य आरोपी सुधीर ने भी अदालत में सरेंडर कर दिया था. इस हिंसा को लेकर यूपी पुलिस और सरकार को लेकर कई सवाल उठे थे.

5. कासगंजः 26 जनवरी के दिन बवाल

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में गणतंत्र दिवस के दिन झंडा यात्रा में गीत बजाने और नारेबाजी के बाद दो गुटों के बीच हिंसा भड़क गई थी. आरोप है कि इस दौरान उपद्रवियों की गोली से एक युवक की मौत हो गई थी. इस मामले में सरकार की काफी किरकिरी हुई. कई लोगों से पूछताछ की गई. इस घटना से सूबे का सियासी माहौल गर्मा गया. विपक्ष ने जमकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा. इस मामले में पुलिस पर वर्ग विशेष के लोगों पर एक तरफा कार्रवाई करने का आरोप भी लगे. हालांकि मुख्यमंत्री ने खुद इस मामले की जांच के आदेश दिए थे.

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