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बजट पर आमने-सामने हुए पक्ष-विपक्ष

सत्ताधारी खेमे ने सराहा बजट तो विपक्ष ने निकालीं खामियां

शिमला : प्रदेश सरकार के बजट को लेकर मंगलवार को सत्तापक्ष व विपक्षी दल के सदस्य फिर से आमने-सामने हुए। मुख्यमंत्री के बजट पर सदन में चर्चा के दौरान जहां एक ओर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसकी सराहना की तो विपक्षी दल के विधायकों ने इसमें कई खामियां निकाली। इस दौरान जब सदस्य सदन में अपनी बात रख रहे थे तो दूसरे पक्ष के विधायक टीका-टिप्पणी करते रहे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल उन्हें रोकते रहे कि आपस में चर्चा न करें।

सत्ताधारी खेमे ने जनहित में बताया बजट
विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया ने बिंदुवार नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के आरोपों को गिनाया और कहा कि वह सदन में हैं नहीं, अथवा अधिक कहते। उनका कहना था कि सरकार पर कर्ज लेने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस ऋण की यह बीमारी खुद लेकर आई है। कांग्रेस जब सत्ता छोड़कर गई तो कर्ज 47 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। हमारी सरकार को तो एक ही साल हुआ है, फिल्म अभी जारी है, यह फ्लॉप नहीं होगी। पांच साल बाद फिर से बॉक्स ऑफिस पर हिट होगी। यह पहली बार हुआ, जब किसी सीएम ने विधायकों को बुला-बुलाकर पूछा कि बजट में क्या डालना है।

इसी तरह जुब्बल-कोटखाई के विधायक नरेंद्र बरागटा ने शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों के वेतन व मानदेय बढ़ाने का स्वागत किया। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन में आयु सीमा बढ़ाने और करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए आयु सीमा बढ़ाने को सरकार का ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री लोक भवन को लेकर विपक्ष की आपत्ति पर कहा कि इसमें एतराज क्या है। बरागटा ने आयुष्मान व हिमकेयर स्वास्थ्य योजनाओं पर केंद्र व प्रदेश सरकार का आभार जताया। साथ ही उज्ज्वला व गृहणी सुविधा योजना को महिलाओं के हित में कहा। उन्होंने जयराम ठाकुर को सफल मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि एक साल में कोई भी राजनीतिक मामला दर्ज न होना ही उनकी सक्सेस स्टोरी है।
इसके अलावा विधायक कर्नल इंद्र सिंह ने कहा कि इस बजट से सारा प्रदेश खुश है। राज्य चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ता है, जिसे कांग्रेस ने ही शुरू किया था। यह सरकार 20 हजार नौकरियां देने जा रही है। जनमंच को बेहतर प्रयास बताते हुए कहा कि इसमें वन-टू-वन इंटरक्शन हो रही है, विपक्ष बस पैसों का खर्च ही गिनता रहे। कर्नल ने सड़कों की हालत पर कहा कि सड़कों में गड्ढे हमें विरासत में मिले हैं। नशे को लेकर मुख्यमंत्री सख्त हैं। बजट पर चर्चा के दौरान विधायक विक्रम जरयाल ने कहा कि जो भ्रष्ट हैं, उन्हें प्रधानमंत्री से कष्ट है और उसका कुछ भी निवारण नहीं। कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में कुछ नहीं किया। पिछली सरकार के समय कंकर वाली दालें मिलती थी। इस सरकार ने गुणवत्ता को बढ़ाया है और 90 करोड़ रुपये भी बचाया है। उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि आज कहीं भी अध्यापकों की कमी नहीं है।

विपक्ष ने बजट को लॉलीपॉप बताया
विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि हमने सोचा युग परिवर्तन होगा, लेकिन जब बजट का पिटारा खुला तो निराश होना पड़ा। उन्होंने जयराम सरकार के बजट को लॉलीपॉप कहा, जिसे वह तीन घंटे तक बांटते रहे। उन्होंने कहा कि बजट में जनजातीय क्षेत्र के लोगों को कुछ नहीं मिला। कटाक्ष किया कि यह वाकई ऐतिहासिक बजट है, जिसमें अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग का नाम तक नहीं है। उन्होंने चुटकी ली कि हिंदी व अंग्रेजी दोनों बजट ऐनक लगाकर पढऩे पर भी इस वर्ग के लिए कुछ नहीं दिखा। हालांकि उन्होंने विधायक निधि बढ़ाने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया, लेकिन कहा कि इस बजट से आम वर्ग को निराशा ही मिली है।

श्री रेणुकाजी के विधायक विनय कुमार ने कहा कि सिरमौर के लिए बजट में कुछ नहीं है। यहां के पर्यटन स्थल चूड़धार के लिए एक अच्छी पगडंडी का प्रपोजल नहीं बनाया गया। इसके के लिए उन्होंने सरकार से मांग की थी। रेणुकाजी झील के लिए भी कोई योजना बजट में नहीं आई। उन्होंने पेंशन की बात करते हुए कहा कि बुजुर्गों के लिए आयु सीमा तो बढ़ाई, लेकिन जिन लोगों की पेंशन रुकी है, उसका क्या। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में चार एनएच की घोषणा हुई, अभी तक कोई हलचल नहीं। मुख्यमंत्री सिरमौर दौरे पर आए थे और हेलिपैड के लिए 10 लाख रुपये दिए, लेकिन यह लगा ही नहीं। मुफ्त सिलेंडर व चूल्हे देने पर उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पीक एंड चूस कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने सिरमौर दौरे के दौरान यहां क्षेत्र विशेष को ट्राइबल एरिया घोषित करने की घोषणा की थी, लेकिन हुआ नहीं। शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान ने बजट का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछली और अब की सरकार में क्या फर्क। यदि हमने गलत किया तो आप हमसे भी ज्यादा गलत हैं। आप अच्छा करो, कुछ अलग करो। अभी सरकार पर 5 हजार करोड़ का ऋण है और जब जाएंगे तो 2022 में यह बोझ बढ़कर 75 हजार करोड़ तक हो जाएगा। जीएसटी लागू होने से हिमाचल को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। प्रदेश में आय संसाधनों को जुटाने की जरूरत है, प्रदेश की आमदनी बढ़ाने पर गंभीर होने की आवश्यकता है। हिमाचल के पर्यटन क्षेत्र में 17 प्रतिशत गिरावट आई है, जिसे उत्तराखंड की तर्ज पर पर्यटन विकसित करना चाहिए।

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