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दर-दर भटका नहीं मिला आशियाना – रो पड़ा जोगी..

Shimla : इस गरीब को सिर छुपाने के लिए अब तक छत नहीं मिल पाई है। प्रधानमंत्री आवास योजना समेत इससे जुड़ी अन्य योजनाओं की यूं तो भरमार है, लेकिन ये योजनाएं धरातल पर कम ही उतर पाती हैं। सिरमौर के पांवटा ब्लॉक के बायला गजोन निवासी जोगी राम की हालत इसका उदाहरण है। लोक निर्माण विभाग में कार्य करते हुए एक बार टांग टूटी तो दूसरी दफा जबड़ा, लेकिन सरकार, सरकारी तंत्र किसी का दिल नहीं पसीजा। नौकरी तो दूर उसे ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया है। पीडब्ल्यूडी से लेकर सरकार तक गुहार लगाई। कई बार सीएम कार्यालय तक पहुंचा। कभी अपने लिए तो कभी बेटे के लिए पक्का रोजगार मांगा। न खुद को रोजगार मिला न बेटे को दिला पाया। आलम यह है कि पीएम आवास योजना के तहत आवास तक मयस्सर नहीं हो पा रहा है। सीएम से लेकर डीसी तक दरख्वास्त दी है। दावा है कि मकान के लिए धनराशि भी मंजूर हो गई थी। बावजूद इसके यह लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाई है।

रो पड़ा जोगी..

बीपीएल परिवार से ताल्लुक रखने वाला जोगी पहले सचिवालय में अधिकारियों के चक्कर काटता रहा। इसके बाद न्याय की आस में दैनिक जागरण कार्यालय पहुंचा। दर्दनाक कहानी कहता-कहता हुआ रो पड़ा। बोला कि साहब मेरी कहीं भी सुनवाई नहीं है। न सरकार में न प्रशासन में। पंचायत में तो रसूख वालों को मकान मिलते हैं। सेवा पानी करने वालों के सब काम हो जाते हैं।

लोक निर्माण विभाग में था दिहाड़ीदार

वर्ष 1986 में दिहाड़ीदार था। कुछ माह बाद कार्य करते हुआ गिर पड़ा। टांग में गहरी चोट आई। इस कारण ड्यूटी पर नहीं जा सका। बीच में ठीक हो गया। 2004 में ठोंठा में विभाग के पत्थर तोड़ते वक्त हादसा हो गया। इससे और चोटिल हो गया। पीजीआइ और आइजीएमसी में इलाज करवाया। भाई के पास जमीन बेचनी पड़ी। तभी इलाज करवा पाया। भाई ने भी मुसीबत में बिना जमीन के पैसे नहीं दिए। जोगी कहता है कि ठोंठा जाखल में जलरक्षक के पद के लिए बेटे ने आवेदन किया था पर वहां भी रोजगार नहीं मिला।

जोगी मेरा भाई ही लगता है। इसे कभी पहले मकान मिला था। तब राशि कम होती थी। यह शिकायतें ही करता रहता है। इसने कईयों को बेवजह तंग किया है। सेवा पानी के आरोप निराधार हैं।

-सूरत सिंह, प्रधान ग्राम पंचायत ठोंठा जाखल।

ग्राम सभा से विशेष प्रस्ताव पास कर पांच केस भेजे हैं। इसमें जोगी राम का केस भी शामिल है। इसे पीएम आवास योजना के तहत मकान मिल जाए तो किसी को आपत्ति नहीं है। अभी मकान स्वीकृत होकर नहीं आए हैं। पंचायत से 50 केस की अलग से सिफारिश की गई थी।

-इंद्र शर्मा, सचिव, ठोंठा जाखल पंचायत।

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