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हिमाचल में कम खर्च हो रही सीएसआर की राशि: जय राम ठाकुर

शिमला. मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसीबिल्टी) की धनराशि कम मात्रा में खर्च हो रही है. उद्योगपति बोलने पर ही सीएसआर की राशि देते हैं. प्रदेश में अभी तक ऐसा कोई प्रभावी तंत्र विकसित नहीं हुआ है, जिसके तहत यह सुनिश्चित हुआ है कि सीएसआर की राशि प्रदेश में ही खर्च हो. सरकार यह प्रयास करेगी कि सीएसआर की राशि प्रदेश में खर्च हो. यह बात उन्होंने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्रकाल के दौरान देहरा के विधायक होशियार सिंह के सवाल के जवाब में हस्तक्षेप करते हुए कही.

जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में ऐसी परिस्थिति भी नहीं होनी चाहिए कि उद्योग ही हतोत्साहित हो. लेकिन प्रदेश में उद्योगों को भूमि और अन्य रियायते दी हैं. सीएसआर की राशि प्रदेश में खर्च करने को सुनिश्चित बनाने को लेकरकोई भी तंत्र नहीं है. उद्योगपतियों को जब सीएसआर के तहत डोनेशन देने को कहा जाता है, वह तभी ही राशि देते हैं. ऐसे में यह प्रयास किया जाएगा कि उद्योग प्रदेश में सीएसआर की राशि खर्च करे.

इससे पहले उद्योग मंत्री की अनुपस्थिति में परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि कंपनी को शुभ लाभ का 2 फीसदी राशि सीएसआर के तहत खर्च करनी पड़ती है.एक्ट के तहत यह उद्योग भारत सरकार के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आते हैं. ऐसे में प्रदेश सरकार अनाधिकारित रूप से इस मामले को उद्योगों से उठाती है, लेकिन सरकार के पास कानूनी रूप से अधिकार नहीं है.

विधायक होशियार सिंह का कहना था कि कंपनियों को प्रदेश में 2 प्रतिशत सीएसआर का खर्च करना आवश्यक होना चाहिए. एक कंपनी का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें एक लाख 500 वर्ग मीटर जमीन दी है. उसे प्रदेश के 3 हजार लोगों को रोजगार देना था, लेकिन वह कंपनी अभी तक शुरू नहीं हुई. वहीं विधायक परमजीत सिंह पम्मी ने अनुपूरक सवाल करते हुए इसके लिए कानून बनाने का सुझाव दिया. इसको लेकर विधायक आशा कुमारी ने भी अनुपूरक सवाल किया.

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