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हिमाचल में इस दिन रखी जाएगी एम्स की आधारशिला

कोठीपुरा में प्रस्तावित एम्स निर्माण को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है. भूमि पूजन के लिए राज्य सरकार ने 21 जनवरी की तारीख तय कर दी है. एम्स निर्माण के लिए देहरादून से दिल्ली भेजी गई फाइल को अप्रूवल मिल गई है. मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा एम्स का भूमि पूजन करेंगे.

हालांकि भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर अभी टूअर प्रोग्राम जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासन के पुख्ता सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. अब भूमि पूजन की प्रक्रिया पूरी होते ही कोठीपुरा में पेड़ कटान शुरू हो जाएगा.
बता दें कि दिसंबर में कोठीपुरा में प्रस्तावित एम्स के निर्माण के लिए फोरेस्ट नोडल अधिकारी शिमला कि ओर से देहरादून भेजी गई फाइल को अप्रूवल मिली थी.

950 पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जाएगी

इसके बाद फाइल फाइनल अप्रूवल के लिए दिल्ली भेजी गई थी. अब जाकर दिल्ली में भी एम्स को इनप्रिंसिपल परमिशन मिल गई है, जिसके बाद एम्स के भूमि पूजन की तैयारियां आरंभ हो गई. एम्स निर्माणा के लिए वन विभाग की 40.5 हेक्टेयर भूमि पर स्थित 20 हजार 950 पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जाएगी. इनप्रिंसिपल परमिशन के तहत एम्स निर्माण के लिए 40.5 हेक्टेयर भूमि पर स्थित कटने वाले पेड़ों का सारा पैसा वन विभाग को देना होता है. इसके बाद संबंधित लैंड की वैल्यू भी जमा करवानी होती है. वहीं, 40 हेक्टेयर भूमि पर कटने वाले पेड़ों की जगह 80 हेक्टेयर भूमि पर पेड़ लगाने होते हैं. इसका सारा खर्चा भी वन विभाग को देना होता है. वन विभाग की 40.5 हेक्टेयर भूमि पर करीब 8450 बड़े और 12 हजार 500 छोटे पेड़ काटे जाएंगे. पेड़ो के काटने को लेकर की गई सर्वे की रिपोर्ट विभाग ने फोरेस्ट नोडल अधिकारी शिमला को भेजी थी. यहां से इस केस को आगामी कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार, फिर देहरादून और फिर दिल्ली भेजा गया था.

वन विभाग बिलासपुर ने 40.5 हेक्टेयर भूमि पर किए गए सर्वे के बाद 30 अक्टूबर को एडीएम विनय कुमार और डीएफओ के साथ साइट पर जाकर इंस्पेक्शन की थी. इसमें अधिकतर पेड़ खैर के ही हैं. इस पूरे सर्वे को मात्र एक माह में पूरा किया गया है, जिसके लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं. ये टीमें रोजाना किए गए सर्वे की सारी रिपोर्ट अपने आरओ के माध्यम से डीएफओ को देती थीं. एम्स निर्माण के लिए चिन्हित की गई भूमि में वन विभाग के अलावा करीब 59 हेक्टेयर भूमि पशुपालन विभाग की भी है. इसके अलावा कुछ हिस्सा रेवेन्यू डिपार्टमेंट का भी है.

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